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कौन-सा शहर बना उत्तर प्रदेश का ‘City of Gastronomy’? जानें क्यों मिला यह सम्मान

अगर आपसे पूछा जाए कि उत्तर प्रदेश का कौन-सा जिला अपने स्वादिष्ट व्यंजनों और अनोखी पाक कला के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, तो इसका जवाब है — लखनऊ। हाल ही में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को ‘City of Gastronomy’ यानी ‘पाक-कला नगरी’ का दर्जा मिला है। यह सम्मान यूनेस्को (UNESCO) ने अपने क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क (Creative Cities Network) के तहत दिया है। भारत में यह सम्मान पाने वाला लखनऊ, हैदराबाद के बाद दूसरा शहर बन गया है। हैदराबाद को यह खिताब वर्ष 2019 में मिला था।

उत्तर प्रदेश: संस्कृति और परंपराओं की भूमि

उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो लगभग 2,40,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह राज्य अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। यहां के हर जिले की अपनी एक अलग पहचान है — कहीं धार्मिक महत्व है, तो कहीं ऐतिहासिक या सांस्कृतिक विशेषताएं देखने को मिलती हैं।

लेकिन, हाल के वर्षों में लखनऊ ने अपने पारंपरिक अवधी व्यंजनों और पाक कला के कारण न केवल देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी एक नई पहचान बनाई है।

उत्तर प्रदेश में कुल कितने जिले हैं?

उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिन्हें 18 मंडलों में विभाजित किया गया है। ये मंडल चार प्रमुख क्षेत्रों में बंटे हैं —

क्षेत्रजिलों की संख्या (लगभग)प्रमुख क्षेत्रीय पहचान
पूर्वांचल28भोजपुरी संस्कृति और धार्मिक स्थल
मध्यांचल20राजधानी लखनऊ और अवधी संस्कृति
पश्चिमांचल17औद्योगिक और शहरी क्षेत्र
बुंदेलखंड10ऐतिहासिक धरोहर और वीरभूमि

इसके अलावा, बघेलखंड और रोहिलखंड जैसे क्षेत्रों का भी सांस्कृतिक रूप से विशेष महत्व है। प्रदेश में कुल 351 तहसीलें, 437 नगर पंचायतें, 28 विकास प्राधिकरण, 17 नगर निगम और 200 नगर परिषदें हैं।

क्या होता है ‘Gastronomy’?

‘Gastronomy’ शब्द भोजन और उसकी संस्कृति से जुड़ा हुआ है। यह सिर्फ खाना खाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि खाने की कला, परंपरा, संस्कृति और विज्ञान का अध्ययन है। गेस्ट्रोनॉमी में यह समझने की कोशिश की जाती है कि लोग क्या खाते हैं, कैसे खाते हैं, किस अवसर पर खाते हैं और भोजन का उनके जीवन में क्या सांस्कृतिक महत्व है। इसलिए जब किसी शहर को ‘City of Gastronomy’ का दर्जा दिया जाता है, तो इसका अर्थ होता है कि उस शहर की पाक परंपरा विश्व स्तर पर अद्वितीय और ऐतिहासिक महत्व रखती है।

किस शहर को मिला है ‘City of Gastronomy’ का दर्जा?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को ‘City of Gastronomy’ का दर्जा मिला है। यह दर्जा यूनेस्को (UNESCO) द्वारा दिया गया है, जिसने लखनऊ की अवधी पाक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है। भारत में अब तक केवल दो शहरों को यह सम्मान प्राप्त हुआ है:

शहरवर्षमान्यता प्राप्त श्रेणी
हैदराबाद2019City of Gastronomy
लखनऊ2025City of Gastronomy

लखनऊ को क्यों मिला ‘City of Gastronomy’ का दर्जा?

लखनऊ को यह दर्जा उसकी अवधी पाक शैली, नवाबी खानपान परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब की वजह से मिला है। यहां की पाक कला सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, विरासत और परंपरा का प्रतीक भी है।

मुख्य कारण:

  1. लखनऊ की पाक परंपरा नवाबों के समय से चली आ रही है।
  2. दम पुख्त शैली में धीमी आंच पर भोजन पकाने की अनोखी विधि यहां की पहचान है।
  3. अवधी भोजन में नरम मसालों और सुगंधित जायकों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
  4. लखनऊ का खानपान हिंदू-मुस्लिम सांस्कृतिक मेल का बेहतरीन उदाहरण है।

लखनऊ के प्रमुख अवधी व्यंजन

लखनऊ के व्यंजनों की बात करें, तो यहां की रसोई अपनी खुशबू और स्वाद दोनों के लिए मशहूर है।

प्रमुख अवधी व्यंजनविशेषता
गलौटी कबाबमुंह में घुल जाने वाला कबाब, जो बिना दांतों के भी खाया जा सके
टुंडे कबाबनवाबी लखनऊ का प्रसिद्ध व्यंजन, 160 से अधिक मसालों से तैयार
अवधी बिरयानीखुशबूदार चावल और मसालों का शानदार मेल
शीरमालकेसर से बना मीठा परांठा
मक्खन मलाईसर्दियों का हल्का और मीठा पकवान, जो मुंह में पिघल जाता है

लखनऊ की ‘दम पुख्त’ शैली

लखनऊ की पाक-कला में दम पुख्त तकनीक का विशेष स्थान है। इसमें भोजन को धीमी आंच पर बंद बर्तन (दम) में पकाया जाता है ताकि सभी स्वाद और सुगंध उसमें पूरी तरह घुल-मिल जाएं। यह शैली नवाबी दौर की देन है और आज भी लखनऊ की पहचान मानी जाती है।

लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब और खानपान

लखनऊ का खानपान केवल स्वाद नहीं, बल्कि एक संस्कृति और तहजीब का प्रतीक है। यहां के व्यंजनों में हिंदू और मुस्लिम दोनों परंपराओं का सुंदर मेल देखने को मिलता है। मिठाइयों से लेकर कबाबों तक, हर डिश में एकता और भाईचारे की झलक दिखाई देती है।

FAQs: City of Gastronomy Lucknow

‘City of Gastronomy’ का क्या अर्थ है?

‘City of Gastronomy’ का अर्थ है ऐसा शहर जो अपनी अनोखी पाक-कला, व्यंजनों की विविधता, ऐतिहासिक खानपान परंपरा और सांस्कृतिक भोजन शैली के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हो। यह दर्जा यूनेस्को द्वारा दिया जाता है।

भारत में कौन-कौन से शहरों को ‘City of Gastronomy’ का दर्जा मिला है?

भारत में अब तक दो शहरों को यह सम्मान मिला है — हैदराबाद (वर्ष 2019), लखनऊ (वर्ष 2025)

लखनऊ को ‘City of Gastronomy’ का दर्जा कब मिला?

लखनऊ को यह दर्जा वर्ष 2025 में यूनेस्को (UNESCO) ने अपने “क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क” (Creative Cities Network) के तहत प्रदान किया।

लखनऊ को ‘City of Gastronomy’ का दर्जा क्यों दिया गया?

लखनऊ को यह दर्जा उसकी प्रसिद्ध अवधी पाक-कला, दम पुख्त तकनीक, नवाबी खानपान परंपरा, और गंगा-जमुनी तहजीब की वजह से मिला है। यहां का भोजन न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि इसमें सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गहराई भी झलकती है।

यूनेस्को का Creative Cities Network क्या है?

यूनेस्को का Creative Cities Network एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसके तहत दुनिया के अलग-अलग शहरों को संगीत, हस्तशिल्प, डिज़ाइन, साहित्य, फिल्म, गैस्ट्रोनॉमी और मीडिया आर्ट्स जैसी श्रेणियों में शामिल किया जाता है। इसका उद्देश्य स्थानीय संस्कृति और रचनात्मकता को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।

लखनऊ को ‘City of Gastronomy’ का दर्जा मिलने से क्या लाभ होगा?

इससे लखनऊ की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय व्यंजन और पारंपरिक खानपान को संरक्षण मिलेगा, और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को ‘City of Gastronomy’ का दर्जा मिलना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। यह सम्मान लखनऊ की समृद्ध अवधी पाक परंपरा, संस्कृति और नवाबी खानपान की विश्व स्तर पर मान्यता है। अब लखनऊ सिर्फ तहजीब और अदब का शहर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपने स्वाद के लिए भी जाना जाएगा।

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Aadit Singh

Aadit Singh Yuva.Help के Founder हैं। इन्होंने Mechanical Engineering में B.Tech किया है और इन्हें Blogging का 1 वर्ष का अनुभव है। Yuva.Help के माध्यम से Aadit युवाओं को सही Career Guidance, शिक्षा से जुड़ी जानकारी और करियर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में मार्गदर्शन प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं।
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